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विमुक्त, घुमंतु समुदाय के लिए विशेष राष्ट्रीय योजना की मांग तेज

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देश के विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध-घुमंतु समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक संकट को लेकर आवाज़ तेज होती जा रही है। समुदाय के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज बाजीगर ने केंद्र सरकार से इन वर्गों के लिए विशेष राष्ट्रीय योजना लागू करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि यह वही समुदाय है जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया गया था। आज़ादी के बाद 1952 में इस कानून को समाप्त कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद यह समाज अब तक मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल नहीं हो सका है।वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया गया कि इस समुदाय के लोग आज भी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सामाजिक स्तर पर भेदभाव और संदेह की भावना बनी हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासनिक उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया कि आर्थिक तंगी और सामाजिक उपेक्षा के चलते कई परिवार अपनी पारंपरिक पहचान छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। बेहतर जीवन और सम्मान की तलाश में वे अन्य विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे एक सामाजिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।

इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से कई प्रमुख मांगें की गई हैं। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक के अंतर्गत निष्क्रिय जमा राशि (DEA फंड) का एक हिस्सा इस समुदाय के विकास के लिए आवंटित करने, राष्ट्रीय स्तर पर विशेष विकास मिशन शुरू करने और सभी राज्यों के साथ समन्वय कर अलग बजट एवं योजनाएं बनाने की बात शामिल है। इसके अलावा पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर भेदभाव और उत्पीड़न रोकने, तथा समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पहचान, आरक्षण और पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने की भी मांग उठाई गई है। इस पूरे मुद्दे को केवल एक समुदाय तक सीमित न मानते हुए इसे सामाजिक न्याय और समानता से जुड़ा विषय बताया गया है। मांग की गई है कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि यह वर्ग भी सम्मान और अधिकार के साथ जीवन जी सके।

 

विमुक्त, घुमंतु समुदाय के लिए उठाई गई प्रमुख मांगें:

  • विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध-घुमंतु समुदाय के लिए विशेष राष्ट्रीय योजना लागू की जाए।
  • Reserve Bank of India के तहत DEA फंड (निष्क्रिय जमा राशि) का एक हिस्सा इस समुदाय के विकास में लगाया जाए।
  • राष्ट्रीय स्तर पर स्पेशल डेवलपमेंट मिशन शुरू किया जाए, जिसमें
    • शिक्षा
    • रोजगार
    • आवास
    • स्वास्थ्य
      पर विशेष फोकस हो।
  • सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग कर
    • राज्यवार बजट
    • विशेष योजनाएं
      तय की जाएं।
  • पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश दिए जाएं ताकि
    • भेदभाव खत्म हो
    • उत्पीड़न रोका जा सके।
  • समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए
    • विशेष पहचान (ID)
    • आरक्षण
    • पुनर्वास योजनाएं
      प्रभावी रूप से लागू की जाएं।
  • सामाजिक सम्मान और बराबरी के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति स्तर के फैसले लिए जाएं।