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महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान के तीन संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। 21 घंटे की चर्चा के बाद सबसे पहले संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग हुई। संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के जरिए 850 सीटें करने का प्रावधान था। इसके पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में 528 सांसदों ने वोट डाले।बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बहुमत नहीं मिलने से ये बिल 54 वोट से गिर गया। इसके बाद सरकार ने बाकी 2 बिल- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 पर सरकार ने वोटिंग कराने से इनकार कर दिया।11 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।बिल के पक्ष में पड़े वोटों की बात करें तो सत्ता पक्ष के पास कुल 293 सांसदों का समर्थन हासिल था, जबकि उससे पांच वोट ज्यादा मिले लेकिन विपक्ष के बड़े दलों ने एकजुट होकर इस बिल के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल जुटने नहीं दिया।इस तरह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।बिल गिरने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।प्रियंका ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र और हमारे देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।शशि थरूर ने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
इसके पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं टीवी पर विपक्ष के नेता का भाषण सुन रहा था। आपकी जिम्मेदारी है कि सदन की गरिमा बनी रही। वे कहते हैं कायर हैं, सरेंडर कर रहे हैं। असंसदीय शब्दों की भरमार लग जाती है। कभी आंख मारते हैं। ये किस तरह का बिहेवियर है। आपकी भाषा को देश सुन रहा है। संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं। फ्लाइंग किस करते हैं। आंख मारते हैं। सत्र छोड़कर विदेश चले जाते हैं। ये भाषाओं में तीव्रता से बावनाएं व्यक्ति नहीं होती। प्रियंका से थोड़ा सीख लें कि सदन में कैसे बोलते हैं। ये जानबूझकर दिया गया स्टेटमेंट है। हजारों साल पहले रामसेतु बनाने के लिए जिस गिलहरी ने योगदान दिया था, उस गिलहरी को भी यहां याद किया जाता है। आप महिला आरक्षण देने वाला बिल में विरोध की हड्डियां डाल रहे हैं। शाह ने कहा- विपक्ष ने अच्छा बुरा सोचे बिना मोदी जी जो करे रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है। देश की माताओं बहनों के लिए आरक्षण आ रहा है तो लग रहा था विरोध नहीं होगा। लेकिन हो रहा है। मैं अभी बताया कि 2023 में सर्वसम्मति से ये बिल पारित हुआ लेकिन आज कांग्रेस पीछे हट रही है। इसके दो ही कारण हैं- क्योंकि बिल मोदी जी ला रहे हैं और क्रेडिट उन्हें मिलेगा।मोदी जी ने उन्हें एड देकर क्रेडिट देने का कह दिया फिर भी ये नहीं मान रहे हैं। हमारे नेता ने कहा कि अंतरआत्मा की आवाज से वोट करिए। अंतरआत्मा की आवाज का नारा इंदिरा जी का है। यहां आत्मा ही नदारद है। चुनाव में जहां जहां जाओगे, महिलाओं का आक्रोश फेस करना पड़ेगा।
शाह ने कहा- हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता कि महिलाओं को प्रस्थापित करने के लिए, उनकी हिस्सेदारी देने के लिए जिसका भी सामना करना पड़े। हम करेंगे, लड़ेंगे और आरक्षण देकर रहेंगे। एक पत्रकार का फोन आया कि विरोध का तो कारण ही नहीं है। मैंने कहा कि देखों सिर्फ महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं हो रहा है। हम ट्रिपल तलाक लाए, विरोध किया, राम मंदिर बनाया विरोध किया, नई संसद बनाई तो विरोध किया, नक्सल वाद खत्म किया, आतंकवाद को सकते में डाला, सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, सबका विरोध किया।