
Pardarshi Vikas News Amethi
पुरानी पेंशन के आंदोलन की तरह टी ई टी की अनिवार्यता के विरोध में सभी शिक्षक संगठन एक हो गए हैं। संयुक्त संघर्ष संचालन समिति और संयुक्त शिक्षक संघ की ओर से 13अप्रैल को बाइक रैली और मशाल जुलूस के आयोजन का निर्णय लिया गया है। बुधवार को वरिष्ठ शिक्षक नेता सुरेन्द्र बहादुर सिंह के मैरिज लान में शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में 13अप्रैल को बाइक रैली निकाल कर टी ई टी के विरोध में ज्ञापन देने और मशाल जुलूस निकालने की कार्ययोजना तैयार की गई। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक संघ और संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले शिक्षक संगठनों ने टी ई टी की अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि संगठन के बल पर ही शिक्षकों ने अब तक सारी लड़ाईयां जीतीं हैं। सम्मान जनक वेतन और मान सम्मान संगठन की देन हैं। विद्यालय और बच्चों की शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी को ईमानदारी और निष्ठा से करते हुए शिक्षकों को अपनी समस्याओं के हल को एकजुट रहने के संदेश दिएउत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री अब्दुल रसीद ने कहा कि टी ई टी की अनिवार्यता सरकार का ग़लत फैसला है। सरकार प्रशासनिक अधिकारियों और जजों के लिए इस तरह के नियम नहीं बनाती। हमारे शिक्षक टी ई टी उत्तीर्ण करने में कमजोर नहीं है। अभी सम्पन्न हुई सीटेड परीक्षा में पुराने शिक्षकों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 68फीसदी रहा है।सरकार उल्टी सीधी नीतियों को जबरदस्ती लागू करके विभाग को खत्म करने की साज़िश कर रही है।अब्दुल रसीद ने जिले के अधिकारियों की गलत कार्य प्रणाली के बारे में शिक्षकों को जानकारी दी और कहा कि अधिकांश बी ई ओ ,बी एस ए और उनके कार्यालय स्टाफ से मिलकर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं।बैठक की अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक और संगठन के संरक्षक सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षकों को आपस में लड़ाकर अपना उल्लू सीधा करने का काम कर रही है। शिक्षकों को एकजुट होकर अपने हितों की लड़ाई लड़ने के संदेश दिए।उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि सरकार निजीकरण की नीतियों की जबरदस्त पैरोकार है और शिक्षकों के विरुद्ध राजसत्ता का दुरूपयोग कर रही है, सभी शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहन ईमानदारी से करते हुए संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहे।टी ई टी की अनिवार्यता पुराने शिक्षकों के सम्मान और सरकार की गलत नीति का मुद्दा है। शिक्षकों ने आज तक सरकार की ओर से दिए गए कठिन से कठिन कार्यों को आगे बढ़ाया है।बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सीटेड पास कर लिया है।टी टी भी पास कर लेंगे, परंतु सम्मान से कोई समझौता नहीं।पी एस पी एस ए के जिला अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप मिश्र ने टी ई टी की अनिवार्यता और पुरानी पेंशन के मुद्दे पर नये और पुराने शिक्षकों से एक जुट होकर संगठन के आह्वान को सफल करने की अपील की।राम सोनी ने शिक्षक हितों की लड़ाई के लिए नये शिक्षकों को एकजुट करने पर जोर दिया। जयराम कनौजिया, संजय कनौजिया,श्री राम सोनी,वसीम अहमद, आदित्य नारायण शुक्ला, अवधेश मिश्रा, बृजराज शुक्ल,प्रवीन कुमार सिंह,महेश प्रसाद , गुरुचरण आदि ने संबोधित किया। संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति की बैठक का संचालन उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री रमाकांत मौर्य ने किया दिनेश कुमार तिवारी, फूलचंद्र बौद्ध, रमेश कुमार प्रजापति, यदुनाथ, सतगुरु प्रसाद,यादव,हरिभान सिंह, शैलेन्द्र आनंद, राजेश कुमार, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, विवेक शुक्ला, दिलीप कुमार, विजेन्द्र यादव, अवधेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
कोट
टीईटी की अनिवार्यता सरकार की ओर से शिक्षकों पर थोपा गया गलत फैसला है,जो नियम विरुद्ध है। हमारे शिक्षक परीक्षा पास करने में कमजोर नहीं है।सीटेड की परीक्षा में पुराने शिक्षकों के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 68फीसदी रहा है।टी ई टी की अनिवार्यता के विरोध में संयुक्त आंदोलन शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ है, सम्मान और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं। सरकार एक न एक दिन स्वयं इस गलत कानून को समाप्त करने के लिए संसद में विधेयक लाएगी। संघर्ष का सफर चाहे जितना लम्बा होगा,हम सरकार को इस निर्णय को वापस लाने के मजबूर करेंगे।
अब्दुल रसीद