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सामाजिक समरसता: शिक्षक की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का आयोजन

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Pardarshi Vikas News Varanasi

 “सामाजिक समरसता: शिक्षक की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का आयोजन अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता, समावेशिता एवं मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करना तथा शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसकी शुरुआत मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती एवं महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने से हुई। 

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मा. डॉ. इंद्रेश कुमार जी, प्रख्यात चिंतक रहे, मुख्य अतिथि प्रो. हर्षद पटेल, कुलपति, गुजरात विद्यापीठ, गुजरात, जबकि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। 

आईयूसीटीई के संकाय प्रमुख, प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, साथ ही कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं उसकी संरचना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसकी महत्ता को रेखांकित किया। सत्र का संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजा पाठक द्वारा प्रस्तुत किया गया। 

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. इंद्रेश कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत ने जीवन मूल्यों को उपदेशों से नहीं, बल्कि आचरण के माध्यम से आत्मसात किया है; अतः सामाजिक समरसता को भी केवल विचार तक सीमित न रखकर व्यवहार एवं आचरण में उतारना आवश्यक है। 

मुख्य अतिथि प्रो. हर्षद पटेल, कुलपति, गुजरात विद्यापीठ, गुजरात ने अपने संबोधन में समावेशी एवं न्यायसंगत शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता की प्रमुख जिम्मेदारी शिक्षक पर ही निर्भर करती है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने कहा कि किसी भी परिवर्तन के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण साधन है, अतः शिक्षक की भूमिका सर्वाधिक निर्णायक है।

द्वितीय सत्र में “सामाजिक समरसता के निर्माण में शिक्षक: चुनौतियाँ और समाधान” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस सत्र में प्रो. सुनील कुमार सिंह, शिक्षा संकाय, बीएचयू, वाराणसी ने 'मूल्य-परक शिक्षा एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता' पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने 'NEP 2020 के अंतर्गत समावेशी शिक्षा की आवश्यकता' पर बल दिया। डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने 'भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समरसता के मूल तत्व' को विस्तार से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने सामाजिक समरसता के संदर्भ में शिक्षा की भूमिका पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी ने शिक्षा में नैतिक मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति के समावेश पर बल दिया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संविमर्श समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी द्वारा किया गया। केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस कार्यक्रम के सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया। इस कार्यक्रम में प्रो. जगदीश सिंह दीक्षित, प्रो. ओ. पी. चौधरी, प्रो. अजय कुमार सिंह, डॉ. संतोष सिंह सहित 100 से अधिक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे