
पारदर्शी विकाश न्यूज़ लखनऊ। यूपी में पंचायत चुनाव कराने में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि पंचायत चुनाव कब तक कराए जाएंगे और इसकी संभावित तारीख क्या है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।यह सुनवाई प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हुई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जबकि चुनाव आयोग चुनाव की संभावित समय-सीमा बताए।याचिकाकर्ता का तर्क है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन समय पर चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को प्रशासक बनाना उनके कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने जैसा है। याचिका में कहा गया कि पहले ऐसी स्थिति में एडीओ पंचायत या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था।प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके एक दिन पहले राज्य सरकार ने आदेश जारी कर मौजूदा ग्राम प्रधानों को अधिकतम छह माह या चुनाव होने तक प्रशासक नियुक्त कर दिया था। इसी फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है।पंचायत चुनाव में देरी की प्रमुख वजहों में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन, ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियां शामिल हैं। अब इस मामले पर सभी की निगाहें 10 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं।