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मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, उर्दू अदब ने खोई बड़ी आवाज

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PARDARSHI VIKASH NEWS उर्दू शायरी को आम लोगों की जुबान तक पहुंचाने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शाम को भोपाल के बड़ा बाग कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बशीर बद्र ने अपने जीवन में करीब 700 गजलें, नज्में और चार हजार से ज्यादा शेर लिखे। उन्हें पद्मश्री और साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया था।1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जला दिया गया था, जिसमें उनकी किताबें, डिग्रियां और वर्षों की यादें राख हो गई थीं। इस दर्द ने उनकी शायरी को और गहराई दी। उनका मशहूर शेर “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…” आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।कवि कुमार विश्वास ने कहा कि बशीर बद्र ने गजल को ड्रॉइंगरूम से निकालकर आम आदमी की भाषा बना दिया। वहीं प्रसून जोशी समेत कई साहित्यकारों और शायरों ने उनके निधन को उर्दू अदब की अपूरणीय क्षति बताया। बशीर बद्र की शायरी मोहब्बत, रिश्तों और इंसानी एहसासों की आवाज थी, जो आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।