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भ्रष्टाचार मामलों में बिना प्रारंभिक जांच FIR संभव

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पारदर्शी विकाश न्यूज़ लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति जैसे मामलों में यदि जांच एजेंसी के पास प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो बिना प्रारंभिक जांच के भी सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकती है। यह फैसला न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दीनानाथ यादव की याचिका खारिज करते हुए सुनाया। याचिका में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोप था कि सतर्कता विभाग की जांच में याची की ज्ञात आय लगभग 1.95 करोड़ रुपये पाई गई, जबकि उनके खर्च करीब 2.51 करोड़ रुपये दर्ज हुए। इस आधार पर लगभग 55 लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया।याची की दलील थी कि एफआईआर से पहले उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं लिया गया, जबकि राज्य सरकार ने कहा कि कानून के अनुसार ऐसे मामलों में प्रारंभिक सुनवाई जरूरी नहीं है।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि रिकॉर्ड से अपराध का प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है तो जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई कर सकती है।