
पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। मामला जनपद के थाना तिंदवारी का है जहां श्रीमती अनूपा शुक्ला ने जून 2024 में अपने ससुरालीजानो के खिलाफ एक इस्तख़ासा बांदा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम के न्यायालय में दाख़िल किया था, और यह आरोप लगाया था कि ससुरालीजन उसे कम दहेज का ताना देकर प्रताड़ित करते हैं एवं पति की मृत्यु के बाद वर्ष 2023 में उसे एवं उसके बच्चों को घर से निकाल दिया। मैजिस्ट्रेट जांच उपरांत इस निष्कर्ष पर पहुँचे की ससुर के अतिरिक्त अन्य रिश्तेदार दूसरे जिलो में रहते हैं एवं ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह बात सिद्ध होती हैं कि अन्य ससुरालीजन उसे प्रताड़ित करते हो। अतः विद्वान मैजिस्ट्रेट ने वर्ष 2025 में 25 जुलाई को सिर्फ ससुर को केस के विचारण हेतु तलब किया। किंतु मजिस्ट्रेट की कोर्ट से अन्य ससुरालीजन के लिये भी समन जारी हो गए। इसके उपरांत जेठ निलेश जेठानी दीपा शुक्ला नन्द शिखा, एवं नंदोई नवदीप शुक्ला ने अपने अधिवक्ता जयंत कुमार द्विवेदी के माध्यम से अपने ऊपर जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी। याची गड़ के अधिवक्ता जयंत कुमार द्विवेदी के तर्कों से सहमति जताते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने याची गणों पर मैजिस्ट्रेट न्यायालय में चल रही समस्त कार्रवाई पर रोक लगा दी और अनूपा शुक्ला को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।