
उल्टा खाता एनपीए! सिबिल खराब होने का आरोप
पारदर्शी विकास न्यूज़ महोबा। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत वर्ष 2020 में बैंक ऑफ इंडिया शाखा महोबा से 5 लाख रुपये का ऋण लेने वाले पीड़ित (प्रार्थी) तौसीफ खान ने बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रार्थी का कहना है कि उन्होंने ऋण लेने के बाद निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से किस्तों का भुगतान किया, लेकिन लगभग दो वर्ष बाद अंशदान (सब्सिडी) समायोजन की प्रक्रिया के दौरान बैंक स्तर पर विवाद उत्पन्न हो गया। आरोप है कि उस समय शाखा प्रबंधक रहे राहुल शिवहरे (वर्तमान में स्थानांतरित) द्वारा अंशदान जारी करने से संबंधित प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। प्रार्थी के अनुसार इसके बाद लगभग ₹1,25,000 की सरकारी अनुदान राशि वापस कर दी गई तथा उनका ऋण खाता एनपीए (नॉन परफॉर्मेंग एसेट ) घोषित कर दिया गया, जिससे उनका सिबिल /क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित हुआ। प्रार्थी का यह भी आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में बैंक के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। वर्ष 2023 से आर्थिक स्थिति प्रभावित होने का हवाला देते हुए प्रार्थी ने इस मामले को स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किया है, जहां प्रकरण की सुनवाई जारी है।