
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस अब रोजमर्रा की खरीदारी और बिल भुगतान का बड़ा माध्यम बन चुका है। दूध-सब्जी खरीदने से लेकर बिजली-पानी का बिल, बीमा प्रीमियम, पेट्रोल और स्कूल-कॉलेज की फीस तक का भुगतान यूपीआई से हो रहा है। इसी बीच यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर नई व्यवस्था की जानकारी सामने आई है। इसमें अलग-अलग प्रकार के भुगतान के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि छोटे और सामान्य भुगतानों को राहत दी गई है।यूपीआई के तहत मेट्रो या ऑटो-पे से होने वाले नियमित भुगतान पर निर्धारित एमडीआर नहीं लगेगा। बिजली-पानी के बिल, ओटीटी सदस्यता, म्यूचुअल फंड निवेश जैसे आवर्ती भुगतान इससे प्रभावित नहीं होंगे। वहीं सामान्य क्रेडिट कार्ड पर करीब 1.5 से 2.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर करीब 0.90 प्रतिशत तक एमडीआर लगने की तुलना की गई है। यूपीआई पर ₹2,000 से अधिक के कुछ लेनदेन के लिए 0.4 प्रतिशत की दर और अधिकतम ₹300 की सीमा वाली व्यवस्था बताई गई है।बीमा प्रीमियम में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट एमडीआर बताया गया है। पेट्रोल पंप पर ₹2,000 तक के भुगतान पर एमडीआर शून्य, जबकि इससे अधिक के भुगतान पर ₹5 फ्लैट एमडीआर की व्यवस्था बताई गई है। इसी तरह बिजली, पानी और पाइप्ड प्राकृतिक गैस जैसे उपयोगिता बिलों में ₹2,000 तक कोई एमडीआर नहीं, जबकि इससे अधिक पर 0.4 प्रतिशत के बजाय ₹5 फ्लैट एमडीआर का उल्लेख है।स्कूल-कॉलेज की फीस के मामले में ₹2,000 तक के शैक्षणिक भुगतान पर एमडीआर नहीं लगेगा। इससे अधिक राशि के भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या निर्धारित अधिकतम सीमा वाली व्यवस्था लागू हो सकती है।इस व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए भी विशेष प्रावधान की बात कही गई है। यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से अलग कोष बनाया जाएगा और इसमें कुल एमडीआर का एक हिस्सा योगदान के रूप में दिए जाने की जानकारी है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाना और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करना बताया गया है।