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अधिवक्ताओं की हड़ताल से कचहरी में पसरा सन्नाटा, वादकारी लौटे मायूस

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। प्रदेश स्तरीय अधिवक्ता सम्मेलन में मांगें पूरी न होने तक सप्ताह में एक दिन न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय के बाद बुधवार को कानपुर कचहरी में अधिवक्ताओं ने हड़ताल की। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में नारेबाजी करते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहने की अपील की और काम बंद करायाहड़ताल के चलते अदालतों में न्यायिक गतिविधियां प्रभावित रहीं। मुकदमों की सुनवाई और तारीख के लिए दूर-दराज से कचहरी पहुंचे बड़ी संख्या में वादकारियों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। कचहरी परिसर में स्टांप वेंडर और फोटोकॉपी समेत कई दुकानें भी बंद रहीं। कुछ अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर भी नारेबाजी की और काम बंद कराया, जिसके चलते रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को वापस लौटना पड़ा।बता दें कि 10 और 11 सितंबर को बार एवं लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिवक्ता और बार संघों के पदाधिकारी शामिल हुए थे। सम्मेलन में अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद मांगें पूरी होने तक प्रत्येक सप्ताह बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया था।

सम्मेलन में उठाई गई प्रमुख मांगें

सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के नाम पर हड़ताल न करने की अंडरटेकिंग के दबाव, एडवोकेट एक्ट 1961 में प्रस्तावित संशोधन, उच्च न्यायालय के एक निर्णय, उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने, गोरखपुर बार एसोसिएशन के दिवंगत अधिवक्ताओं के परिजनों को मुआवजा देने, न्यायाधीशों की जवाबदेही के लिए न्यायिक आयोग के गठन तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांगों पर चर्चा हुई।बुधवार को बार एवं लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा और राजीव यादव की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन के तहत प्रत्येक सप्ताह बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय जारी रहेगा।