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फर्जी नियुक्ति से नगर निगम में नौकरी का खेल?

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच के बीच अब बिना नियुक्ति एक युवक से सात महीने तक काम कराने का मामला सामने आया है। मार्ग प्रकाश विभाग में लाइनमैन के तौर पर काम करने वाले सुनील कुमार ने नगर आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर सात महीने के बकाया वेतन का भुगतान कराने और दोबारा काम पर रखने की मांग की है। शिकायत के बाद अधिकारियों के सामने कथित फर्जी नियुक्ति का मामला भी खुला।सुनील का दावा है कि उसने जुलाई 2025 में मार्ग प्रकाश विभाग के जोन-5 कार्यालय में लाइनमैन के तौर पर काम शुरू किया था। उसके मुताबिक निलंबित स्वीचमैन कमरुद्दीन के कहने पर जेई आलोक बाजपेई ने उसे काम पर लगाया था। करीब पांच महीने उसने आलोक बाजपेई के अधीन और दो महीने जेई संदीप के अधीन काम किया। उसका आरोप है कि सात महीने काम करने के बावजूद उसे कोई वेतन नहीं दिया गया।सुनील ने बताया कि इसी दौरान उसे चालक का काम भी सौंपा गया। चोट लगने के बाद उसने काम छोड़ दिया और परिवार को वेतन नहीं मिलने की जानकारी दी। अब कमरुद्दीन के निलंबन के बाद उसने नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की।मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि रिकॉर्ड में सुनील की कोई नियुक्ति ही नहीं मिली। इसके बावजूद शिकायत के दौरान उसकी फेस रिकग्निशन से अटेंडेंस लगने का दावा किया गया। अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए उसे बिना जांच के वापस भेज दिया और थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।वहीं कमरुद्दीन पर विभाग में लंबे समय से प्रभाव रखने के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि वह स्थानांतरण के बावजूद जल्द ही पुरानी तैनाती पर लौट आता था और मार्ग प्रकाश से जुड़े उपकरणों की खरीद व वितरण में भी उसकी भूमिका रहती थी। अब पुलिस शिकायत और विभागीय जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

 

नगर आयुक्त ने थाने में शिकायत की सलाह दी
सुनील ने नगर निगम में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का हवाला देते हुए कमरुद्दीन के खिलाफ शिकायत करने की बात कही है। नगर आयुक्त ने उसे संबंधित शिकायत थाने में दर्ज कराने की सलाह दी है।

नगर निगम में चला रहा था सिंडीकेट
स्विचमैन कमरुद्दीन भैरवघाट की तैनाती विद्युत शवदाह गृह में थी। करीब 22 साल से अधिक समय से वह यहीं तैनात था। इस दौरान कई बार उसका तबादला किया गया, लेकिन वह अपने प्रभाव के चलते दो से चार दिन में ही वापस उसी जगह आ जाता था। इतना ही नहीं मार्ग प्रकाश विभाग कमरुद्दीन ही चलाता था। स्विच, लाइटों और तार समेत अन्य उपकरणों की खरीद से लेकर उनके वितरण तक यही देखता था। विभाग के चीफ इंजीनियर के बाद इसी की चलती थी। हालांकि पिछले दिनों उसको निलंबित कर दिया गया।