
PARDARSHI VIKASH NEWS इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल शादी न होने या रिश्ता टूट जाने के आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने मुरादाबाद से जुड़े एक मामले में निचली अदालत द्वारा जारी सम्मन और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।पीड़िता ने कपिल सोम और एक अन्य व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, शोषण करने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाया था।अदालत ने कहा कि किसी मामले को दुष्कर्म तभी माना जा सकता है, जब यह साबित हो कि आरोपी की शुरुआत से ही शादी करने की कोई मंशा नहीं थी और उसने धोखे से संबंध बनाए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “शादी का वादा टूटना” और “शुरुआत से झूठा वादा करना” दोनों अलग स्थितियां हैं। फैसले में कहा गया कि लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते के बाद उत्पन्न मतभेदों को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने यह भी माना कि मामले में जातिसूचक टिप्पणी के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। कोर्ट के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।