
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी। विधानसभा चुनाव निकट आते ही निषाद पार्टी ने पिछड़ी जातियों की सूची से बाहर की गई एक दर्जन जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करते हुए एस सी आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की मांग के साथ ज्ञापन देने का अभियान शुरू किया है। निषाद पार्टी इस मुद्दे को लेकर विधायकों और सांसदों को घेर रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने के लिए निषाद पार्टी ने सोमवार को सुल्तानपुर और मंगलवार को अमेठी में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि ओबीसी के आरक्षण कोटे से 9 फीसदी आरक्षण काट कर अनुसूचित जाति का आरक्षण तीस फीसदी कर दिया जाए उत्तराखंड राज्य की तरह अध्यादेश/शासनादेश जारी कर और बिल पारित कराकर मझवार, तुरैहा, निषाद,केवट ,मल्लाह, कश्यप,कहांर,धीमर,बिन्द,बाथम,तोरिया,गोडिया, मांझी,मछुआ जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने हेतु कार्मिक विभाग की ओर से शासनादेश जारी करने की मांग की गई है।
मंगलवार को अमेठी में विधायक महाराजी प्रजापति के आवास पर निषाद पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंच गए। विधायक महाराजी प्रजापति आवास पर नहीं थी। उनके प्रतिनिधि के रूप में अरुण प्रजापति ने ज्ञापन लिया और विधायक की ओर से इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखने और सदन में मांग को उठाने का आश्वासन दिया।प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि संविधान एवं उत्तर प्रदेश शासन की अधिसूचनाओं के अनुरूप मझवार–तुरहा समाज को अनुसूचित जाति (SC) का जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराया जाए तथा प्रदेश के सभी जिलों एवं तहसीलों में शासनादेश का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कई स्थानों पर आज भी मझवार–तुरैहा समाज के लोगों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे वे अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित आरक्षण, सरकारी योजनाओं एवं अन्य संवैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल-निषाद पार्टी प्रदेश के सभी जनपदों में जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दे रही है।हम चाहते हैं कि ओबीसी के विधायक और सांसद लोकसभा और विधानसभा के सत्र के दौरान हमारी आवाज उठाएं और सरकार शासनादेश निर्गत करें।
सागर कुमार कश्यप ,जिला अध्यक्ष