
पारदर्शी विकास न्यूज़ सुलतानपुर। साहित्य व्यक्ति को मनुष्य बनाता है इसका क्षेत्र व्यापक है। साहित्य का काम मानवीय मूल्यों की स्थापना करना है। साहित्य जीवन और समाज के सुख दुख व संघर्षों से हमें परिचित कराता है। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विभा सिंह ने कहीं। महाविद्यालय के विवेकानंद सभागार में बाबू धनंजय सिंह स्मृति आंतरिक व्याख्यान माला के अंतर्गत आयोजित साहित्य और मानव जीवन विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि साहित्य की सभी धाराओं का एकमात्र उद्देश्य आदर्श समाज की स्थापना करना ही है। साहित्य मनुष्य के सुख-दुख की कहानी है जो दिलों की नफ़रत को मिटाकर इंसानियत जगाती है। प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बाबू धनंजय सिंह आंतरिक व्याख्यान माला के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में चल रही यह व्याख्यान माला शिक्षकों व विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास में मददगार साबित हो रही है। संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि और आभार ज्ञापन हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर इन्द्रमणि कुमार ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ आलोक कुमार पाण्डेय, मुख्य कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेन्द्र प्रताप सिंह व परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर धीरेन्द्र कुमार समेत समस्त शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।