news-details

जहां गिरा था मां पार्वती का झुमका

You can share this post!

 

पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी । मणिकर्णिका तीर्थ का चक्र पुष्करणी कुंड, जिसे मणिकर्णिका कुंड भी कहा जाता है, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार यह कुंड सृष्टि के आरंभ से भी पहले का बताया गया है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस स्थान पर हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसी दौरान उनके सुदर्शन चक्र से चक्र पुष्करणी कुंड का निर्माण हुआ। बाद में भगवान शिव और माता पार्वती के स्नान के समय माता पार्वती का दिव्य कर्णफूल यानी झुमका इसी कुंड में गिर गया। तभी से इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा।ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर काशी में मणिकर्णिका कुंड के पास स्थित श्री विष्णु चरण पादुका का विशेष पूजन किया जाता है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु और शिव की आराधना करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्थान पर स्नान और पूजा करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। काशी का यह तीर्थ आज भी आस्था और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है।