
PARDARSHI VIKASH NEWS हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गन कल्चर और शस्त्र लाइसेंस के दुरुपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त रुख अपनाते हुए कई प्रभावशाली लोगों, जिनमें कुछ राजनेता और कथित बाहुबली शामिल हैं, के शस्त्र लाइसेंसों और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन व्यक्तियों के नाम सरकारी हलफनामों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं, उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि और लाइसेंस संबंधी विवरणों को सामने लाया जाए।यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संत कबीर नगर निवासी जयशंकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में राज्य में शस्त्र लाइसेंस वितरण प्रणाली, उसके नवीनीकरण और नियमों के अनुपालन में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था।हाईकोर्ट ने पहले भी इस मामले में राज्य सरकार से मंडलवार शस्त्र लाइसेंसों का विस्तृत ब्यौरा मांगा था। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए, उनसे अदालत संतुष्ट नहीं हुई। हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं, जबकि 23,407 आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा 6,062 मामलों में ऐसे लोगों को लाइसेंस जारी किए गए हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। साथ ही 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस पाए गए हैं। 1,738 अपीलें विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं।इन आंकड़ों को गंभीर मानते हुए अदालत ने कहा कि यह स्थिति राज्य में शस्त्र नियंत्रण व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाती है और इस पर तत्काल पारदर्शी सुधार की आवश्यकता है।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि कई मामलों में राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों की जानकारी प्रशासनिक स्तर पर दबा दी जाती है या स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की जाती। इसी कारण अब ऐसे सभी व्यक्तियों की जोनवार जांच की जाएगी, जिनके पास शस्त्र लाइसेंस हैं और जिन पर आपराधिक पृष्ठभूमि के आरोप हैं।अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इन व्यक्तियों के सुरक्षा इंतजामों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें कितने सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराए गए हैं और उनके पास कितने शस्त्र मौजूद हैं।इस आदेश के तहत जिन प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया है, उनमें विभिन्न जोनों के कथित बाहुबली और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। इनमें नोएडा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और अन्य जोनों से जुड़े कई व्यक्तियों के लाइसेंस और सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।हाईकोर्ट ने राज्य के सभी पुलिस कप्तानों और पुलिस कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि वे पूरी जानकारी एक शपथपत्र (अंडरटेकिंग) के साथ प्रस्तुत करें, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी तथ्य छिपाया नहीं गया है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाई जाती है तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा।अदालत ने कहा कि यह मामला केवल शस्त्र लाइसेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक प्रभाव और अपराध के गठजोड़ की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इसकी जांच व्यापक और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर हलचल तेज हो गई है और सभी संबंधित जिलों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।