
PARDARSHI VIKASH NEWS लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग तथा ओबीसी आयोग से प्रगति रिपोर्ट तलब की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका संख्या 559/2026 सहित संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि दोनों आयोग 10 जुलाई 2026 तक शपथपत्र के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया और आरक्षण निर्धारण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। याचिकाकर्ताओं ने 25 मई 2026 के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 243-ई का उल्लंघन बताया गया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं है। इसी कारण पूर्व निर्वाचित प्रतिनिधियों को छह माह के लिए अंतरिम व्यवस्था के रूप में प्रशासक नियुक्त किया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित करने की प्रक्रिया में है तथा छह माह की अवधि के भीतर चुनाव कराने का प्रयास किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को निर्धारित की है।
प्रशासक और सेक्रेटरी के संयुक्त खाते नहीं खुले
अमेठी। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और उन्हें प्रशासक नियुक्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद जिले की सभी ग्राम पंचायतों में काम ठप हैं। पुराने खाते बंद हैं,प्रशासक और सेक्रेटरी केपद नाम से एकाउंट नहीं खुल पाए हैं। अधिकांश ग्राम पंचायतों में खाते बंद पड़े हुए हैं। खंड विकास अधिकारी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानों का कार्यकाल बढ़ने के बाद खातों के संचालन के सम्बन्ध में अभी कोई निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है।