
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का बाल रोग विभाग स्कूली बच्चों पर भारी स्कूल बैग के असर को लेकर अध्ययन करेगा। यह रिसर्च करीब 18 महीने तक चलेगी, जिसमें 5 से 15 वर्ष तक की उम्र के 400 से 500 बच्चों को शामिल किया जाएगा। अध्ययन पूरा होने के बाद रिपोर्ट भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी, ताकि स्कूल बैग के वजन को लेकर बेहतर दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकें।रिसर्च के लिए कानपुर के 10 से 15 बड़े स्कूलों का चयन किया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करेगी। इसके लिए वैज्ञानिक फॉर्मेट तैयार किया गया है, जिसे एथिकल कमेटी की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार गौतम ने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सामने आया है कि बच्चे के वजन के मुकाबले अधिक भारी बैग रीढ़, गर्दन और कंधों पर असर डाल सकता है। इससे बच्चों का पोस्चर खराब होने के साथ हड्डियों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।डॉक्टरों के अनुसार ओपीडी में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ रही है, जिन्हें कम उम्र में ही कमर, गर्दन और कंधों में दर्द की शिकायत हो रही है। कई बच्चों को फिजियोथेरेपी की जरूरत भी पड़ रही है।इस अध्ययन में बाल रोग, ऑर्थोपेडिक्स, एसपीएम और सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर बच्चों के लिए स्कूल बैग के सुरक्षित वजन को लेकर नए नियम बनाए जाने की संभावना है।