
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा की गई एफपीपीसीए (फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट) गणना को गलत करार दिया है। आयोग ने आदेश दिया कि एफपीपीसीए की मासिक गणना केवल उसी महीने की वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर की जाएगी।आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य महीने की देनदारी या पुराने बकाये को एफपीपीसीए में शामिल नहीं किया जा सकता। साथ ही पावर कॉरपोरेशन को भविष्य में नियमों के अनुसार ही गणना करने के निर्देश दिए गए हैं।बिजली कंपनियों ने जून महीने में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत एफपीपीसीए लगाया था। इसमें करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाये को भी शामिल किया गया था। आयोग के फैसले के बाद जुलाई से बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।इस मामले में आयोग के समक्ष एक अन्य याचिका भी दाखिल की गई है, जिसमें पिछले 14 महीनों में की गई अतिरिक्त वसूली को वापस कराने की मांग की गई है। आयोग अब इस पर भी सुनवाई करेगा।