
PARDARSHI VIKASH NEWS वाराणसी में ठुमरी गायिकी की महान हस्ताक्षर और बनारस घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी की 97वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी भी शामिल हुईं।कार्यक्रम में मालिनी अवस्थी ने अपने गुरु गिरिजा देवी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने पूर्वी अंग की ठुमरी गायिकी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने बताया कि गिरिजा देवी ने संगीत की शिक्षा गुरुओं के सान्निध्य में रहकर प्राप्त की थी और शास्त्रीय के साथ-साथ उपशास्त्रीय संगीत पर भी उनकी गहरी पकड़ थी।मालिनी अवस्थी ने इस मौके पर पश्चिम बंगाल की राजनीति और हालिया चुनाव परिणामों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनता ने मतदान के जरिए यह संदेश दिया है कि अहंकार और अत्याचार को वह स्वीकार नहीं करती। उनके अनुसार लोकतंत्र में जनता समय आने पर स्पष्ट निर्णय देती है।उन्होंने आगे कहा कि बंगाल केवल एक राज्य नहीं बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है, जहां रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों ने जन्म लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बंगाल एक बार फिर राष्ट्रीय मुख्यधारा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम के दौरान मालिनी अवस्थी ने भावुक होकर कहा कि काशी और कोलकाता की संस्कृति में गहरा संबंध है और दोनों शहर गंगा और मां काली की परंपरा से जुड़े हैं।गिरिजा देवी को उनके योगदान के लिए पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने लंबे संगीत जीवन में ठुमरी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और 2017 में उनका निधन हुआ था।