
PARDARSHI VIKASH NEWS तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार, इस पार्टी की स्थापना 2023 में बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू ने की थी, जिसमें उत्तिया कुंडू अध्यक्ष और उनकी पत्नी कोषाध्यक्ष हैं। पार्टी का मुख्यालय हावड़ा में स्थित है, जहां हाल ही में सुरक्षा बलों की तैनाती भी देखी गई। NCPI ने 2023 में त्रिपुरा चुनाव में हिस्सा लिया था, लेकिन उसे बहुत सीमित वोट मिले थे और इसके बाद पार्टी की गतिविधियां लगभग निष्क्रिय हो गई थीं।बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग गुट के रूप में मान्यता और संसद में अलग सीटिंग की मांग की है। इन सांसदों का कहना है कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए वे दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आते और NCPI में विलय को वैध माना जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने NDA के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। वहीं, TMC के मूल गुट ने इस कदम को अस्वीकार करते हुए स्पीकर से अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की है।इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है, जहां बागी सांसदों के अलग बैठने की व्यवस्था और पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर अधिकार को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज हो सकती है। ममता बनर्जी गुट का कहना है कि असली TMC कौन है, इसका फैसला अदालत में होगा। यह पूरा मामला अब संसद से लेकर न्यायपालिका तक पहुंचने की संभावना के साथ एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।