
PARDARSHI VIKASH NEWS तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों पक्षों की राय सुनने के बाद फैसला करेंगे। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर कार्यालय ने बागी सांसदों के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नेतृत्व से भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने को कहा है। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले इस मामले में निर्णय लिया जा सकता है।जानकारी के मुताबिक, स्पीकर कार्यालय इस संवेदनशील मामले में कानून मंत्रालय से लिखित कानूनी राय भी मांग सकता है। मंत्रालय वरिष्ठ विधि अधिकारियों से परामर्श के बाद अपनी राय देगा, ताकि भविष्य में यदि फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए तो वह कानूनी कसौटी पर खरा उतर सके।इससे पहले TMC के 20 बागी सांसदों में से 17 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की और अपने समूह को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय करने की जानकारी भी दी थी।संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सांसद अपने स्तर पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकते। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य के अनुसार, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत केवल राजनीतिक दल ही दूसरे दल में विलय का निर्णय ले सकता है। ऐसे में बागी सांसदों के दावे और उनकी कानूनी स्थिति पर अंतिम फैसला स्पीकर के निर्णय और कानूनी व्याख्या पर निर्भर करेगा।वहीं TMC का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सांसद अभिषेक बनर्जी को बैठक के लिए बेहद कम समय का नोटिस मिला था, जबकि वह उस समय प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ में शामिल थे।