
PARDARSHI VIKASH NEWS तमिलनाडु और पुडुचेरी से आए 50 छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी का भ्रमण कर ब्रज संस्कृति, परंपराओं, कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान में संचालित सांस्कृतिक, साहित्यिक और रासलीला संबंधी गतिविधियों को भी करीब से देखा।आयोजित संगोष्ठी में ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने ब्रज के मंदिरों की दर्शन परंपरा और उनके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने रासलीला प्रशिक्षण, मंचन और गीता प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मथुरा की सांसद एवं प्रसिद्ध कलाकार Hema Malini भी दक्षिण भारत से हैं और ब्रज संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।कार्यक्रम में गीता विशेषज्ञ डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने गीता के राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों और संविधान की मूल भावना में भी गीता के सिद्धांतों की झलक दिखाई देती है। भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के सुपौत्र वैज्ञानिक डॉ. शांति भूषण त्रिपाठी ने भी गीता के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।प्रतिनिधिमंडल 1 से 10 जून तक जीएलए विश्वविद्यालय में आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत मथुरा प्रवास पर है। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों एवं विद्वानों ने भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और समझने के अनुभव को विशेष बताया।