
PARDARSHI VIKASH NEWS प्रयागराज। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पदनाम को लेकर चल रहे विवाद में सिविल कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अमन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 80(2) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। यह वाद आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दायर किया गया है, जिन्होंने स्वयं को ब्रह्मलीन जगद्गुरु स्वामी माधवाश्रम जी महाराज का उत्तराधिकारी और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का शिष्य बताया है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, प्रमुख गृह सचिव, जिलाधिकारी प्रयागराज, मेला अधिकारी तथा दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रतिवादी बनाया गया है। वादी पक्ष का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के यथास्थिति संबंधी आदेशों के बावजूद शंकराचार्य पदनाम का उपयोग कर सरकारी मान्यता, भूमि आवंटन और अन्य सुविधाएं लेने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुकदमा दायर करने की अनुमति देने के साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और ठाकुर सुधांशु सोम को स्वयं अदालत में अपनी पैरवी करने की भी अनुमति प्रदान की है।