
pardarshi vikas news
देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की दिशाहीनता और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर शोध छात्र और लेखक Sharad Kanojia ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज देश, राज्य, समाज और छात्रों की जो स्थिति दिखाई दे रही है, वह केवल किसी एक व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि कमजोर होती शिक्षा प्रणाली का परिणाम है।शरद कनौजिया ने कहा कि शिक्षा आयोग 1964-66 में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी कक्षाओं में तैयार होता है। लेकिन वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा, अंक और नौकरी तक सीमित होता जा रहा है। शिक्षक और छात्र के बीच आत्मीय संबंध कमजोर पड़ते जा रहे हैं, जबकि भारतीय शिक्षा व्यवस्था की यही सबसे बड़ी पहचान थी।उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई शिक्षक शिक्षण कार्य से अधिक पद, प्रतिष्ठा और राजनीति में सक्रिय दिखाई देते हैं। कक्षाओं में नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों को केवल संभावित प्रश्न बताकर जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है। इसके कारण छात्रों में संस्कार, विवेक, शोध और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुणों की कमी देखने को मिल रही है।उन्होंने कहा कि युवाओं को कभी बेरोजगारी, कभी भ्रष्ट तंत्र और कभी पेपर लीक जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक मानसिक, आर्थिक और शारीरिक असर छात्रों पर पड़ता है।शरद कनौजिया ने नई शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए कहा कि नीति में शिक्षक को केवल विषय विशेषज्ञ नहीं बल्कि मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माता के रूप में स्थापित करने की बात कही गई है। शिक्षक का कार्य केवल परीक्षा की तैयारी कराना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना होना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक अपने दायित्व को समझकर छात्रों को सही दिशा देंगे तो आने वाली पीढ़ियां मजबूत होंगी। अन्यथा समाज में बढ़ती हिंसा, असहिष्णुता, तनाव और दिशाहीनता जैसी समस्याएं और गंभीर होती जाएंगी।