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सहकार भारती अभ्यास वर्ग में सहकारिता पर मंथन

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पारदर्शी विकास न्यूज़ आगरा। सहकार भारती आगरा विभाग एवं मंडल की ओर से बलवंत विद्यापीठ ग्रामीण संस्थान, बिचपुरी में आयोजित दो दिवसीय अभ्यास वर्ग के प्रथम दिन चार महत्वपूर्ण सत्र संपन्न हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विभाग प्रमुख एवं मुख्य संरक्षक राकेश चंद्र शुक्ला ने अभ्यास वर्ग के उद्देश्य और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। ब्रज प्रांत के पालक अधिकारी दिलीप ने कार्यकर्ता निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के विषय पर विचार रखे।प्रथम सत्र में वी.के. मिश्रा ने सहकारी समितियों के गठन, संचालन एवं निबंधन की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने सहकारिता को प्रभावी बनाने के लिए संगठनात्मक समझ और नियमों की जानकारी को आवश्यक बताया। दूसरे सत्र में प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी ने स्वावलंबी भारत अभियान पर मार्गदर्शन देते हुए आत्मनिर्भरता के लिए सहकारिता की भूमिका पर चर्चा की।तीसरे सत्र में राष्ट्रीय पैक्स प्रकोष्ठ प्रमुख राजदत्त पांडेय ने सहकार भारती के इतिहास, संगठन की कार्यपद्धति और विभिन्न प्रकोष्ठों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। चौथे सत्र में कार्यकर्ताओं की समूह बैठक आयोजित हुई, जिसमें संगठन से जुड़े विषयों, स्थानीय समस्याओं और आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।प्रथम दिन करीब 80 कार्यकर्ताओं ने विभिन्न सत्रों में सहभागिता की। इस दौरान 50 से अधिक कार्यकर्ताओं के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।



सहकारिता के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्यपद्धति और समाज की जरूरतों की समझ होना जरूरी है। सहकार भारती का प्रयास है कि सहकारिता का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले। — राजदत्त पांडेय


सहकारी समितियों के गठन और निबंधन की प्रक्रिया को समझना प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए महत्वपूर्ण है। मजबूत और पारदर्शी सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यकर्ताओं को नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी के साथ लोगों को सहकारिता से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें और संगठन मजबूत हो — वी.के. मिश्रा


स्वावलंबी भारत के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब समाज के लोग मिलकर आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं तो आत्मनिर्भरता का मार्ग मजबूत होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से रोजगार, उत्पादन और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। युवाओं और कार्यकर्ताओं को सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। — प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी