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सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का महाअभियान

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हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान के सेवा मेले की तैयारियां तेज

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान द्वारा आयोजित होने वाले सेवा मेले की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न दायित्वों का वितरण किया गया। बैठक में टोली प्रमुखों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए गए कि वे 11 और 12 जुलाई को अपनी-अपनी टीमों की बैठक आयोजित कर तैयारियों की समीक्षा करें तथा सभी कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करें। बैठक में संस्थान के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और सेवा मेले की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान समाज के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सेवा संगठनों को एक मंच पर लाकर उनके सेवा कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का कार्य करता है। सेवा मेले के माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी जाती है कि विभिन्न संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, संस्कार, महिला सशक्तिकरण, गौसेवा, ग्राम विकास और मानव सेवा के क्षेत्र में किस प्रकार कार्य कर रही हैं तथा समाज का प्रत्येक व्यक्ति इन सेवा कार्यों से किस प्रकार जुड़ सकता है।बैठक में बताया गया कि संस्थान का कार्य 'ईशावास्यम् इदं सर्वम्' तथा 'आत्मनो मोक्षार्थम् जगत हिताय च' जैसे भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित है। संस्थान का उद्देश्य मानव सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा राष्ट्र निर्माण में जनसहभागिता को बढ़ावा देना है। वक्ताओं ने कहा कि संस्थान किसी संकीर्ण सोच के साथ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकाचार और सेवा परंपरा को मजबूत करने के उद्देश्य से कार्य करता है।सेवा मेले के दौरान समाजोपयोगी गतिविधियों के साथ विभिन्न सेवा संस्थाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जहां आम नागरिकों को सेवा कार्यों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें इन कार्यों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाएगा। मेले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और संस्कार आधारित कार्यक्रमों को प्रमुखता दी जाएगी।बैठक में संस्थान की छह प्रमुख विषय-वस्तुओं—वन एवं वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय एवं पारिवारिक मूल्यों का संवर्धन, नारी सम्मान तथा राष्ट्रभक्ति—पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन मूल्यों का संरक्षण केवल समाज ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी आवश्यक है। सेवा मेला इन्हीं विषयों पर जनजागरण का माध्यम बनेगा।बैठक में यह भी बताया गया कि सेवा मेला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला जनआंदोलन है। इसमें विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। भारतीय पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रचनात्मक प्रतियोगिताएं तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति और सेवा भावना से जोड़ने का कार्य करेंगे।अंत में सभी कार्यकर्ताओं से सेवा मेले को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाने का आह्वान किया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि संगठित प्रयास, सेवा भाव और सामाजिक समरसता के माध्यम से ही राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। बैठक में उपस्थित सभी टोली प्रमुखों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का संकल्प लिया। आयोजन समिति से जुड़े अमर नाथ जी,एम डी द्विवेदी, बालेन्द्र  जी, आदित्य पोद्दार जी, संजीव दीक्षित जी, आशीष चौहान, प्रवीन जी  समेत कई कार्यकर्त्ता मौजूद रहे।