
आजमगढ़ में विश्व बौद्ध महासंघ के पदाधिकारियों से हुई संवाद बैठक
PARDARSHI VIKASH NEWS लखनऊ। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रोफेसर एवं पालि भाषा के वरिष्ठ विद्वान डॉ. प्रफुल्ल गडपाल ने कहा कि पालि भाषा का अध्ययन भगवान बुद्ध की वाणी और बौद्ध दर्शन को समझने के लिए बेहद जरूरी है। युवाओं को पालि भाषा और बौद्ध दर्शन से जोड़ना समय की आवश्यकता है।बुधवार को आजमगढ़ में संस्कृत विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान डॉ. गडपाल ने विश्व बौद्ध महासंघ के पदाधिकारियों से मुलाकात की। अभिधम्मा हॉस्पिटल परिसर में आयोजित संवाद बैठक में करीब दो घंटे तक बौद्ध दर्शन, पालि भाषा और धम्म साहित्य पर चर्चा हुई।डॉ. गडपाल ने कहा कि पालि भाषा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है। त्रिपिटक सहित बौद्ध धम्म के प्रमुख ग्रंथ पालि भाषा में हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के सौ से अधिक देशों में बौद्ध धम्म के अनुयायी हैं और भारत में भी बौद्ध अध्ययन को लेकर युवाओं में रुचि बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि देश के करीब 35 विश्वविद्यालयों में पालि भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था है। कई विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन के लिए अलग विभाग संचालित हैं। उन्होंने विश्व बौद्ध महासंघ को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में संगठन विस्तार के लिए कार्ययोजना बनाने की सलाह दी।इस अवसर पर विश्व बौद्ध महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एसके सिद्धार्थ, एसएल बौद्ध, बुद्ध रत्न रविदास, राम दरश बौद्ध, रवीन्द्र कुमार, भोला बौद्ध, सुरजीत कुमार गौतम, हिमांशु बौद्ध सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
बौद्ध दर्शन व्यक्ति को अपने प्रयास, विवेक और नैतिक आचरण के माध्यम से जीवन में शांति और मुक्ति का मार्ग दिखाता है। पालि भाषा भगवान बुद्ध के उपदेशों की मूल भाषा है।आरसी बौद्ध
राष्ट्रीय संरक्षक, विश्व बौद्ध महासंघ