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मां की आंखों में आंसू, बहन की चीखें...

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पहले बचाई 8 जिंदगियां, फिर दी कुर्बानी

पारदर्शी विकास न्यूज़  कानपुर। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद बुधवार को उनके कानपुर स्थित शास्त्री नगर आवास पहुंचा। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां, बहन, पत्नी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में रिश्तेदार, पड़ोसी और स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचे।परिजनों ने सरकार से सागर गुप्ता को शहीद का दर्जा देने, उचित आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। उनका कहना है कि सागर ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए असाधारण साहस का परिचय दिया और दूसरों की जान बचाते हुए स्वयं अपनी जान गंवा दी।परिवार के अनुसार, 18 जुलाई को ब्लैक सी में ड्यूटी के दौरान जिस जहाज पर सागर तैनात थे, उस पर हमला हुआ था। पहले हमले के बाद उन्होंने जहाज पर मौजूद आठ क्रू मेंबर्स को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जहाज को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने के प्रयास के दौरान दूसरा हमला हुआ, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी परिवार को 21 जुलाई को उनके एक मित्र के माध्यम से मिली थी। इसके बाद से परिजन पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहे थे।सागर गुप्ता अपने पीछे पत्नी शालू गुप्ता, पांच वर्षीय बेटी गौरी, सात माह के बेटे कृष्णा, मां रामादेवी, बड़े भाई मनीष गुप्ता सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और अंतिम समय तक अपने साथियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।पार्थिव शरीर के घर पहुंचने पर परिजनों ने तिरंगा ओढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। परिवार का कहना है कि सागर के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए, ताकि उनके बलिदान को देश सदैव याद रख सके।
 

 

तिरंगा ओढ़ाते हुए कहा- सम्मान मांगा था, नहीं मिला
परिवार की एक शिकायत भी सरकार से सामने आई। तिरंगा ओढ़ाते हुए परिवार के लोग बोले- हमने भाई के लिए सम्मान मांगा था, वो शहीद हुआ है। लेकिन सम्मान नहीं दिया गया। उसे तिरंगे में लाना चाहिए था।

 

भाई बोला- शहीद का दर्जा, बहू को नौकरी मिले
मृतक के भाई मनीष गुप्ता ने कहा कि सरकार से तिरंगा मांगा था वह भी नहीं मिला। सरकारी नौकरी, दोनों बच्चों को 2 करोड़ का मुआवजा मिले तभी वह शव उठाएंगे।