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केंद्रीय हिंदी संस्थान को विश्वविद्यालय बनने की मंजूरी, यूजीसी से मिली एनओसी

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Pardarshi Vikas News Agra

केंद्रीय हिंदी संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने संस्थान को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया है। इसके साथ ही संस्थान को अगले तीन वर्षों के भीतर सभी आवश्यक शैक्षणिक, प्रशासनिक और आधारभूत मानक पूरे करने होंगे। मानक पूरे होने के बाद संस्थान को आधिकारिक रूप से विश्वविद्यालय का दर्जा मिल सकेगा।

यूजीसी की मंजूरी के बाद संस्थान परिसर में उत्साह का माहौल है। अब संस्थान को ढांचे के विकास, अकादमिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने, शोध सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों पर तेजी से काम करना होगा।

संस्थान को मानद विश्वविद्यालय बनाए जाने की प्रक्रिया के तहत वर्ष 2022 में एक समिति गठित की गई थी। समिति के संयोजक वरिष्ठ प्रोफेसर उमापति दीक्षित थे, जबकि अनुपम श्रीवास्तव और केसरी नंदन सदस्य रहे। समिति ने यूजीसी की हाई पावर कमेटी के सामने ऑनलाइन प्रस्तुति देकर बताया था कि केंद्रीय हिंदी संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा क्यों दिया जाना चाहिए।

समिति की प्रस्तुति और भविष्य की कार्ययोजना से संतुष्ट होकर यूजीसी ने आगे की प्रक्रिया के लिए एनओसी जारी कर दी। अब केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय से अंतिम औपचारिक स्वीकृति के बाद संस्थान को मान्यता मिलेगी।

विश्वविद्यालय बनने के बाद संस्थान स्वयं डिग्री जारी कर सकेगा। पाठ्यक्रम, परीक्षा और मूल्यांकन में स्वायत्तता मिलेगी। नए कोर्स शुरू करने, शोध परियोजनाओं के लिए सीधी फंडिंग पाने, पीएचडी कार्यक्रमों को विस्तार देने और विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा। इससे हिंदी भाषा और शोध को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।