
PARDARSHI VIKASH NEWS काशी के आचार्य कृष्ण कांत तिवारी अब स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम स्थित एक हिंदू मंदिर में नियमित पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। वे वहां भगवान विष्णु और महेश सहित कुल 13 देवताओं की पूजा-अर्चना, राग-भोग और वैदिक कर्मकांड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।आचार्य कृष्ण कांत तिवारी मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले हैं और पिछले लगभग 10 वर्षों से काशी में वैदिक कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठानों का अभ्यास और संचालन कर रहे थे। उन्होंने संस्कृत विषय में शास्त्री और आचार्य की उपाधि भी प्राप्त की है।स्वीडन के इस मंदिर में चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने कर्मकांड, राग-भोग और आरती से जुड़े सवालों के सही जवाब दिए। खास बात यह रही कि योग और कराटे में उनकी दक्षता ने अन्य उम्मीदवारों से उन्हें अलग पहचान दिलाई।उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके साथ ही रहने और भोजन की सुविधा भी मंदिर प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई है। हालांकि धार्मिक वीजा व्यवस्था के तहत वे साल में केवल छह महीने ही स्वीडन में कार्य कर सकते हैं।यह मंदिर स्टॉकहोम हिंदू सोसायटी द्वारा संचालित है, जिसे एक हिंदू परिवार ने स्थापित किया है। यहां प्रतिदिन करीब 200 श्रद्धालु आते हैं, जबकि त्योहारों के दौरान यह संख्या लगभग 2000 तक पहुंच जाती है।आचार्य कृष्ण कांत तिवारी यहां केवल पूजा-पाठ ही नहीं करा रहे, बल्कि स्वीडन में रहने वाले हिंदू परिवारों के लिए यज्ञोपवीत, अनुष्ठान और अन्य धार्मिक संस्कार भी संपन्न करवा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य भारतीय परंपराओं और संस्कृति को विदेशों में जीवंत बनाए रखना है।उनके चयन में बीएचयू के पूर्व छात्र और स्वीडन में वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान सिंह की भूमिका भी बताई जा रही है, जिन्होंने उनके अनुभव और योग्यता को देखते हुए आवेदन का सुझाव दिया था।आचार्य तिवारी का कहना है कि वे भारतीय वैदिक परंपराओं और हिंदू धर्म के सार्वभौमिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, जिससे विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ और सद्भाव बढ़ सके।