
PARDARSHI VIKASH NEWS अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक शांति समझौता (पीस डील) के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर मीडिया इंटरव्यू तक वेंस इस समझौते का खुलकर बचाव कर रहे हैं। समझौते को लेकर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं के बीच उन्होंने राष्ट्रपति Donald Trump की नीति का मजबूती से समर्थन किया है।व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान के साथ बैक-चैनल बातचीत में वेंस की अहम भूमिका रही है। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर उन्होंने वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। आगामी 60 दिनों तक स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ताओं की निगरानी की जिम्मेदारी भी उनके पास है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है और मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो वेंस 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में खुद को एक प्रभावशाली वैश्विक नेता और सफल कूटनीतिज्ञ के रूप में पेश कर सकते हैं। हालांकि समझौते की विफलता की स्थिति में सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान भी उन्हें ही उठाना पड़ सकता है।इसी बीच वेंस की नई किताब Communion: Finding My Way Back to Faith भी चर्चा में है। उनकी धार्मिक और व्यक्तिगत यात्रा पर आधारित यह पुस्तक रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक और धार्मिक मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio भी 2028 की रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों और प्रेडिक्शन मार्केट्स में वेंस और रूबियो के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान समझौते की सफलता या असफलता आने वाले वर्षों में रिपब्लिकन पार्टी की नेतृत्व की तस्वीर तय कर सकती है।