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हथेली में छिपा है शरीर का ‘रिमोट कंट्रोल’

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पारदर्शी विकास न्यूज़  अमेठी। गायत्री मंदिर अमेठी में चल रहे एक्यूप्रेशर चिकित्सा एवं प्रशिक्षण शिविर के छठवें दिन सोमवार को बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर एक्यूप्रेशर के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। शिविर में डॉ. अमर प्रताप सिंह चंद्रवंशी ने शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़े दबाव बिंदुओं की जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय चिंतन में “यद् ब्रह्माण्डे तद् पिण्डे” की अवधारणा रही है। अर्थात जो कुछ ब्रह्मांड में है, उसका प्रतिबिंब मानव शरीर में भी विद्यमान है।उन्होंने कहा कि हथेली तथा हाथ-पैर की उंगलियों में अनेक महत्वपूर्ण दबाव बिंदु होते हैं। एक्यूप्रेशर पद्धति में इन बिंदुओं पर उचित तरीके से दबाव देकर शरीर के विभिन्न अंगों को सक्रिय करने और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के उपाय बताए जाते हैं। उन्होंने गैस, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, दमा, स्पॉन्डिलाइटिस, मोटापा, किडनी व हृदय संबंधी समस्याओं सहित विभिन्न रोगों में एक्यूप्रेशर के उपयोग की जानकारी दी। साथ ही स्पष्ट किया कि गंभीर अथवा आकस्मिक स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।शिविर में उपचार करा रहे चंद्रभान सिंह ने बताया कि एक्यूप्रेशर से उनके पैर के दर्द में राहत मिली है। स्वास्तिक नगर निवासी रमाकांत मिश्रा ने भी लाभ मिलने की बात कही। जीआइसी के पूर्व प्रवक्ता डॉ. राम कुमार तिवारी ने कहा कि शिविर में बहुत उपयोगी जानकारी मिल रही है। चिकित्सा संबंधी उपायों में वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का समन्वय आकर्षित कर रहा है।इस अवसर पर डॉ. सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव, राधेश्याम त्रिपाठी, रामकुमार त्रिपाठी, डॉ. रामसुंदर यादव, अनुराग प्रताप सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, बृजेश सिंह, राणा प्रताप सिंह, मिथिलेश गुप्ता, शीला जायसवाल, कुसुम शर्मा, रामादेवी, मुन्नू चंद्र अग्रवाल, गोपीचंद, मगन लाल कौशल आदि मौजूद रहे।