
पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। स्वच्छता एक शब्द नहीं बल्कि ऐसा भाव है जो एक व्यक्ति द्वारा क्रियान्वयन करने पर सैकड़ों लोगों को लाभ पहुंचाता है उदाहरण स्वरूप किसी एक मोहल्ले में साफ सफाई रखने पर वहां पर बिमारियों का खतरा भी कम हो जाता है जिसका फायदा उन्हें भी होता है जो इस सफाई रूपी अभियान में साथ नहीं होते। अगर देखा जाए तो वर्तमान में लोगों की स्वच्छता के प्रति लापरवाही बढ़ती जा रही है जिसकी वजह से लगातार नई नई बिमारियों का उदय हो रहा है तथा बड़ी मेहनत से अर्जित किया हुआ धन बर्बाद हो जाता है।हमारे प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से झाडू तक लगायी उसके साथ ही सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च करके ज्यादातर घरों में शौचालय बनवाने का काम किया जिससे हमारे यहां की सड़कें शौच मुक्त हो सकें किंतु अफसोस कुंठित मानसिकता से ग्रसित लोग आज भी गांव की मुख्य सड़कों को शौच के लिए इस्तेमाल करते हैं जो कि बहुत दुखद व निंदनीय है तथा बाहर से आये अतिथियों के सामने जनपद की छवि धूमिल करने वाला कार्य है। समाजसेवी सुमित शुक्ला ने जनपद वासियों से अपील करते हुए कहा है कि गांव व जनपद को हरा - भरा तथा सुंदर रखने की हम सब की सामुहिक जिम्मेदारी है इससे भागना नहीं चाहिए इसके साथ ही तालाब कुंआ तथा अन्य जल स्रोतों के संरक्षण की भी कोशिश करनी चाहिए प्राथमिक विद्यालयों जैसे शिक्षण संस्थाओं के आस पास कूड़ा कर्कट फेंकना तथा बस्ती से लगी सभी सड़कों के दो किलोमीटर के दायरे में शौच करना जैसी आदतों पर रोक लगनी चाहिए। अगर प्रशासन इस दिशा में रूचि दिखाये तो स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तथा वृक्षारोपण जैसे पुनीत कार्यों में जनता को जोड़ने व उनकी सहभागिता से गांव व जनपद स्वच्छ व हरा - भरा हो सकता है।