
संजीव भारती
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अमेठी विधानसभा सीट हाट सीट मानी जाती है। अमेठी के राजनीतिक भविष्य और विरासत की जंग को लेकर लखनऊ से दिल्ली तक चर्चा है।2027के विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट के कई लोग हाथ पांव मार रहे हैं। विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। अमेठी की राजनीति में प्रभावशाली दो परिवारों के बीच विरासत की जंग भी तेज है। भाजपा,सपा, कांग्रेस और बसपा 2027के मैदान में किसे उतारती है, टिकट की लड़ाई कौन जीतेगा,इस बात को लेकर अभी से ही तरह तरह चर्चाएं हैं।साढ़े तीन लाख से अधिक मतदाताओं वाली यह विधानसभा सीट आजादी के बाद से चुनाव परिणामों को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रही है। यहां सबसे अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं, दूसरे नंबरपर एस सी मतदाता हैं जिनमें सबसे अधिक संख्या कोरियों की है।अमेठी विधानसभा की राजनीति भारतीय लोकतंत्र के बदलते स्वरूप का दर्पण है। यहां राजशाही प्रभाव,जनसंघ की इंट्री, कांग्रेस का बर्चस्व, चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, जनता दल और समाजवादी राजनीति का उभार, विरासत की जंग में सहानुभूति की लहर राजा बनाम प्रजा की लड़ाई सब कुछ दिखता है।इस सीट ने पढ़े लिखे योग्य विधायकों के साथ राजा, प्रजा, किसान,अगडे पिछड़े, महिलाएं सभी को विधानसभा में भेजा है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में यहां सहानुभूति की लहर तेजी से दौड़ी है,इस दौड़ ने राजनीति के जानकार कुशल, कूटनीतिज्ञ और मजबूत नेताओं को पीछे कर दिया । वर्तमान में इस सीट पर विरासत की जंग तेज है।आजादी के बाद 1951में जब पहला विधानसभा चुनाव हुआ तो राजपरिवार के कुंवर रणंजय सिंह ने निर्दलीय विधायक के रूप में विधानसभा चुनकर गए। उन्होंने तीन बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया, परंतु सत्ता से अधिक सेवा को महत्व दिया और जीवन भर शिक्षा प्रसार, समाज सुधार और धर्म प्रचार के अपने संकल्प पर कायम रहे।1980में डॉ संजय सिंह कांग्रेस पार्टी से पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने तीन बार सदन में प्रतिनिधित्व किया और उत्तर प्रदेश सरकार में कई विभागों के मंत्री के रूप में काम किया। मंत्री के रूप में डॉ संजय सिंह द्वारा अमेठी के सैकड़ों लोगों को सरकारी नौकरियां दिलाईं गई, अमेठी के बुजुर्ग आज भी इसकी चर्चा करते हैं।2002मे डॉ संजय सिंह की पत्नी डा अमीता सिंह विधायक चुनी हुई।2007में बसपा लहर में भी वे दुबारा विधायक बनी। उत्तर प्रदेश सरकार में प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री रहीं।2012में सपा से गायत्री प्रसाद प्रजापति विधायक चुने गए और डॉ अमीता से चुनाव हार गई।2014से अमेठी राज परिवार में विरासत की जंग तेज हो गई और 2017में भाजपा ने डॉ संजय सिंह की पहली पत्नी रानी गरिमा सिंह को टिकट दे दिया। मतदाताओं ने रानी अमीता सिंह की जगह रानी गरिमा सिंह को पसंद किया।2022के विधानसभा चुनाव में रानी गरिमा सिंह, उनके बेटे अनंत विक्रम सिंह और रानी अमीता सिंह के दावे को खारिज करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय सिंह को टिकट दिया।राजा और प्रजा की लड़ाई में इस बार सहानुभूति की लहर महाराजी प्रजापति के साथ रही और कुशल राजनीतिज्ञ डा संजय सिंह को चुनाव हारना पड़ा।
चुनाव के पहले टिकट और विरासत की जंग
आजादी के बाद से अब तक लगभग पचास साल विधानसभा में अमेठी का प्रतिनिधित्व राज परिवार ने किया है।इस बार भी राजपरिवार भाजपा से टिकट का दावेदार हैं। महाराज के नाम से लोकप्रिय डा संजय सिंह स्वयं सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ अमीता सिंह सांय काल गांवों का दौरा कर चौपाल लगा रही हैं। अनंत विक्रम सिंह से अधिक दौरा उनकी पत्नी शाम्भवी सिंह कर रही हैं। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि डॉ संजय सिंह और अमीता सिंह, अपनी बेटी आकांक्षा सिंह को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।उधर प्रजापति परिवार में महाराजी प्रजापति की जगह कौन टिकट के लिए मजबूत दावेदारी करेगा, अभी कुछ भी तय नहीं है। अनिल प्रजापति,एम एल सी का चुनाव लड चुकी शिल्पा प्रजापति, अनुराग प्रजापति के साथ अरुण प्रजापति के नाम लिए जा रहे हैं। परिवार से कौन चुनाव लड़ेगा, अंतिम निर्णय पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति करेंगे।इन दो परिवारों की विरासत की जंग में भाजपा और सपा से आधा दर्जन नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं जिनमें रश्मि सिंह, काशी प्रसाद तिवारी,प्रवीण कुमार सिंह, अमरेन्द्र सिंह पिंटू , मनीराम वर्मा, हीरालाल यादव,गुंजन सिंह और जय सिंह प्रताप यादव के नाम सामने आए हैं। बसपा से जितेन्द्र मिश्र का नाम लिया जा रहा है।
जनता की सेवा और सम्मान हमारे पूर्वजों का इतिहास :डा अमीता सिंह
पूर्व मंत्री डॉ अमीता सिंह जनसमर्थन बढ़ाने के लिए गांव गांव चौपाल लगा रही हैं। उनकी बैठक शाम को होती है।सोनारीकला में बैठक के दौरान उन्होंने राजपरिवार के इतिहास के साथ स्वयं और डॉ संजय सिंह की ओर से जनता के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए सेवा का अवसर मांगा और कहा कि राजनीति हमारे लिए सेवा का माध्यम है।हम अमेठी को उत्तर प्रदेश के मानचित्र में आदर्श क्षेत्र के रूप में विकसित करना चाहते हैं।