
PARDARSHI VIKASH NEWS पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए कहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में किसी प्रकार की चीनी नहीं होती, इसलिए फ्यूल टैंक के पास चींटियां दिखने संबंधी दावे भ्रामक हैं। सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल के उपयोग से इंजन खराब होने की कोई पुष्टि शिकायत सामने नहीं आई है और इससे वाहन बीमा की वैधता पर भी कोई असर नहीं पड़ता। मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफल उपयोग हो रहा है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है, किसानों की आय को बढ़ावा मिला है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन भी पेश किया गया है, जिसमें 85% तक एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। हालांकि E85 का उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस वाहनों में ही किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि बायोफ्यूल और एथेनॉल आधारित ईंधन देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।