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एस आई टी जांच पर विपक्ष को भरोसा नहीं

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चढ़ावा चोरी के  मुद्दे को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल सामने आए
हर चट्टी चौराहे पर चर्चा में है कथित राम भक्तों की करतूत

संजीव भारती 
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अयोध्या।
 अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्म है। कांग्रेस नेताओं के अयोध्या पहुंचने के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरने के अपने तरीके में बदलाव करते हुए अयोध्या के अपने समर्थकों से चंदा चोरी के आरोपियों के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है और एस आई टी पर जांच में लीपापोती का आरोप लगाया है।आम आदमी पार्टी ने चंदा चोरी की सीबीआई जांच या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने उठाया था।आम आदमी पार्टी इसके बाद सामने आई।एस आई टी गठित होने के बाद कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी मामले में सरकार को घेरना शुरू किया। दोनों पार्टियां की ओर से ज्ञापन सौंपे गए।आम आदमी पार्टी ने चम्पत राय के नाम से भिक्षा मांगकर उन्हें 420रु के ड्राफ्ट भी भेजें।बहुजन समाज पार्टी की मुखिया सुश्री मायावती ने इस मुद्दे पर सबसे बाद में बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि चढ़ावा चोरी में शामिल एक भी दोषी बख्शे नहीं जाने चाहिए।इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।जिले में गांव जंवार के हर चट्टी चौराहे पर राम मंदिर में चोरी का मामला सुर्खियों में है।चाय पान की दुकानों पर लोग ट्रस्ट की आड़ में लूट करने वाले लोगों को गरिया रहे हैं और इन्हें संरक्षण देने वाली राजनीतिक ताकतों को निशाने पर लिए हुए है।घोरहा के अशोक सिंह हिटलर ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार में अन्याय, अत्याचार बढ़ा हुआ है। भ्रष्टाचार भगवान के मंदिर तक पहुंच गया है।

 

आम आदमी पार्टी ने की सी बी आई जांच की मांग
आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को जारी एक बयान में राम मंदिर चंदा चोरी और कथित भ्रष्टाचार के मामले में भारतीय जनता पार्टी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और श्रद्धा के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभु श्रीराम के नाम पर देशभर से हजारों करोड़ रुपये का चंदा जुटाकर चंदा चोर पार्टी ने जनता की धार्मिक भावनाओं का शोषण किया और अब योगी सरकार की SIT पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच CBI अथवा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।संजय सिंह ने कहा कि अब इस मामले में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि अयोध्या का समाज भी खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या अधिवक्ता संघ ने घोषणा की है कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा सहित चंदा चोरी के आरोपों से जुड़े लोगों का कोई अधिवक्ता मुकदमा नहीं लड़ेगा। अधिवक्ता संघ ने तीन दिन के भीतर उन्हें अयोध्या से बाहर करने का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर पूरे अयोध्या में जाम और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि रामनगरी अब ऐसे लोगों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है और उनका सामाजिक बहिष्कार शुरू हो चुका है।संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संरक्षण में बनी व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर नियुक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति से हुईं, तब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गठित SIT उस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पूरे मामले में कार्रवाई के बजाय केवल लीपा-पोती और दोषियों को बचाने का प्रयास दिखाई दे रहा है।