
टीवीके को कांग्रेस के बाद सीपीआई और सीपीआई (एम) का समर्थन, वीसीके भी तैयार
चेन्नई। तमिलनाडु में एक्टर विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम को सीपीआई और सीपीआई (एम) ने समर्थन देने की घोषणा कर दी है। सूत्रों का दावा है कि विदुथलाई चिरुथैगल काची भी विजय को समर्थन देने को तैयार है।
टीवीके ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती हैं। दो सीटों पर विजय जीते हैं। उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। ऐसे में बहुमत के लिए 11 विधायक और चाहिए। कांग्रेस के 5 विधायक पहले ही टीवीके को समर्थन दे चुके हैं। सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके के पास 2-2, कुल 6 विधायक हैं।
ऐसे में टीवीके को सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायकों की संख्या पूरी हो गई है। इस बीच, टीवीके चीफ विजय ने आज लगातार तीसरे दिन राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मिलने का समय मांगा है। इससे पहले 6 और 7 मई को भी वे राज्यपाल से मिले थे।
6 मई को विजय ने आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लेकिन तब उनके पास सिर्फ 113 विधायकों का समर्थन था। 7 मई को राज्यपाल ने विजय से कहा कि 118 विधायकों का समर्थन दिखाने के बाद ही वे उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।
टीवीके को बहुमत नहीं मिलने के केस में द्रमुक और अद्रमुक में गठबंधन के बाद सरकार गठन की अटकलें थीं। टीवीके ने कहा कि अगर दोनों पार्टियों ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, तो उसके सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे। टीवीके समर्थकों ने शुक्रवार सुबह गवर्नर हाउस (लोकभवन) के सामने प्रदर्शन और नारेबाजी की। पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में लिया। कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद द्रमुक ने लोकसभा में अपने सांसदों की सीट बदलने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि गठबंधन टूटने के बाद सदन में कांग्रेस के साथ बैठना सही नहीं है।
कांग्रेस को साथ लाने के लिए विजय को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। कांग्रेस ने पहले दिन ही द्रमुक से अलग होकर अपने 5 विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। हालांकि सरकार बनाने के लिए नम्बर अब भी कम थे। यहां राज्य की क्षेत्रीय व वामपंथी पार्टियों की भूमिका अहम हो गई। जैसे-जैसे अनिश्चितता बढ़ी, द्रमुक के साथ लंबे समय से जुड़े दलों ने भी अपने रुख पर दोबारा विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच यह चर्चा भी होने लगी कि द्रमुक और अद्रमुक विजय को रोकने के लिए हाथ मिला सकते हैं और बीजेपी भी इसका हिस्सा होगी। वहीं राज्यपाल ने दो बार मुलाकात के बाद भी विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया, जिस पर सीपीआई और वीसीके भड़क उठे और खुलकर विरोध जताया। तब विजय ने पर्दे के पीछे से इन पार्टियों से सहयोग मांगा।