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DNT विधेयक पर दिल्ली में सम्मान समारोह, जताया आभार

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कृतज्ञता एवं अभिनंदन समारोह में सांसद के लक्ष्मण का हुआ भव्य स्वागत

pardarshi vikas news delhi 
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (DNT, NT एवं SNT) समुदायों के अधिकारों को लेकर 9 अप्रैल 2026 को राजधानी दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक भव्य “कृतज्ञता एवं अभिनंदन समारोह” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से 200 से अधिक प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, सामुदायिक नेता और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्यसभा में इन समुदायों के लिए निजी सदस्य विधेयक प्रस्तुत करने पर आभार व्यक्त करना और उनके अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से राज्यसभा सांसद Dr. K. Laxman को सम्मानित किया गया, जिन्होंने हाल ही में संसद में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों को संवैधानिक मान्यता दिलाने हेतु एक महत्वपूर्ण निजी सदस्य विधेयक पेश किया है। इस विधेयक को इन समुदायों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, क्योंकि ये समुदाय लंबे समय से सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करते आए हैं।समारोह का नेतृत्व डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष भारत भाई पाटनी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है, जो वर्षों से पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. लक्ष्मण द्वारा उठाया गया यह कदम इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

 

कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि DNT, NT और SNT समुदायों को अब केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाकर नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाना चाहिए। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक स्वीकृति से जुड़ी जमीनी समस्याओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है, जिससे उनका समुचित विकास बाधित होता है।राज्यसभा में प्रस्तुत विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। इसमें संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन कर इन समुदायों को अधिसूचित करने का प्रावधान है, जिससे उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समान अधिकार और सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही एक स्थायी संवैधानिक आयोग के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है, जो इन समुदायों के अधिकारों की निगरानी के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सरकार को सुझाव देगा।इस अवसर पर प्रवीण घुगे, संतोष पाल , चितरंजन चिवा , कृष्णा सिसोदिया, जसवंत योगी, शंकरभाई योगी, चीमनभाई रावल, रामानंद राजभर, श्यामवीर कठेरिया, शैलेंद्र सिंह वर्मा और सुशील कुमार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और विधेयक पेश होने पर खुशी जताई। सभी वक्ताओं ने इसे समाज के उत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए Dr. K. Laxman और भारत भाई पाटनी के प्रति आभार व्यक्त किया।भारत भाई पाटनी ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, गरिमा और समान अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने सभी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार से अपील की कि वे मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि इन समुदायों को उनका हक मिल सके।अपने संबोधन में Dr. K. Laxman ने कहा कि विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय देश के सबसे वंचित वर्गों में से हैं और उनके लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उसी दिशा में एक प्रयास है, जिससे इन समुदायों को संवैधानिक पहचान और सुरक्षा मिल सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को आगे भी मजबूती से उठाते रहेंगे।कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि “गरिमा, पहचान और समावेशी राष्ट्र-निर्माण” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक लक्ष्य है, जिसे हासिल करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह रहा, बल्कि DNT समुदायों के अधिकारों और भविष्य को लेकर एक मजबूत राष्ट्रीय मंच के रूप में भी उभरा।

 

डीनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय आज भी समाज की मुख्यधारा से दूर हैं, जबकि इनका इतिहास और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वर्षों से ये समुदाय पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक वह सम्मान और अवसर नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार हैं। ऐसे में Dr. K. Laxman द्वारा स्थायी राष्ट्रीय आयोग के गठन के लिए विधेयक लाना एक ऐतिहासिक कदम है। इससे इन समुदायों को न केवल पहचान मिलेगी, बल्कि उनके अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। सरकार से अपील करता हूँ कि इस विधेयक को शीघ्र पारित कर इन वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जाए।-कैलाश निषाद

 

 

यह समारोह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है। डीनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों ने सदियों तक उपेक्षा और भेदभाव का सामना किया है, लेकिन अब समय आ गया है कि उन्हें उनका अधिकार और सम्मान मिले। Dr. K. Laxman के प्रयासों की सराहना करता हूँ उनका यह कदम इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फाउंडेशन का उद्देश्य इन समुदायों की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना और उन्हें नीति निर्माण में सहभागी बनाना है। सभी सामाजिक संगठनों और सरकार से अपील करता हूँ कि वे मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।-भरत भाई पटनी

 

 

डीनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय देश के सबसे वंचित वर्गों में शामिल हैं, जिनकी समस्याएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। स्थायी राष्ट्रीय आयोग की स्थापना समय की मांग है, ताकि इन समुदायों को न्याय, सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिल सकें। हमारा उद्देश्य केवल विधेयक प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि इन्हें उनका अधिकार दिलाना है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचेगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। मैं सभी से अपील करता हूं कि इस प्रयास को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करें। — डॉ. के. लक्ष्मण