
अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला लिया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है।बताया जा रहा है कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसियों ने अब तक सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।हालांकि, चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम एफआईआर में शामिल नहीं हैं। इसके बावजूद दोनों के इस्तीफे को जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और नैतिक जवाबदेही के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कई दिनों से विपक्ष लगातार दोनों के इस्तीफे की मांग कर रहा था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा था।
विपक्ष ने उठाए सवाल
फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि यदि ट्रस्ट के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की निगरानी में यह पूरा तंत्र संचालित हो रहा था तो नैतिक जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।वहीं कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि केवल इस्तीफे पर्याप्त नहीं हैं। उनके अनुसार जांच पूरी होने के बाद यदि किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

SIT फिर जा सकती है अयोध्या
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी एक बार फिर अयोध्या जाकर जांच कर सकती है। प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ नए नाम और तथ्य सामने आने की जानकारी मिली है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
कैसे शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद और अन्य चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की शिकायतों से हुई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने कई दिनों तक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों से पूछताछ और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की।
आगे क्या?
अब पूरे मामले में सभी की नजर एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो और लोगों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा रहा है। वहीं ट्रस्ट में रिक्त हुए पदों पर नई नियुक्तियों और जांच के निष्कर्षों का भी इंतजार किया जा रहा है।