
PARDARSHI VIKASH NEWS देश के अधिकांश बड़े शहरों में 25% से 60% तक पानी लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो रहा है। मुंबई में रोज करीब 3,850 एमएलडी पानी सप्लाई होता है, जिसमें लगभग 30% पानी पाइपलाइन लीकेज और चोरी में नष्ट हो जाता है। यह मात्रा भोपाल और इंदौर की कुल दैनिक जरूरत से भी ज्यादा है। स्मार्ट सिटी और अमृत 2.0 परियोजनाओं के तहत जल लीकेज कम करने के लिए पिछले 10 वर्षों में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन कई शहरों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में पानी का लीकेज 48% और इंदौर में 65% तक पहुंच चुका है। बेंगलुरु में 35% और मुंबई में हजारों करोड़ रुपए का पानी हर साल बर्बाद हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पुरानी पाइपलाइनें, अवैध कनेक्शन, स्मार्ट मीटरिंग की कमी और अंडरग्राउंड नेटवर्क की सही निगरानी न होना इसके प्रमुख कारण हैं। देश के 166 बड़े जलाशयों में केवल 33% पानी बचा है, जबकि बढ़ती गर्मी के कारण शहरों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने एआई सेंसर, जीआईएस मैपिंग, स्मार्ट मीटरिंग, पाइपलाइन रिप्लेसमेंट और नियमित ऑडिट जैसे उपायों को जरूरी बताया है, ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके और भविष्य के जल संकट से निपटा जा सके।