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बुन्देलखण्ड पृथक राज्य निर्माण में बाधा बने ‘माननीय’

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पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय ने बयान जारी करते हुए कहा कि वर्षों तक सत्ता में रहने वाले अनेक जनप्रतिनिधियों को कभी बुंदेलखंड राज्य निर्माण की याद नहीं आई। लेकिन जैसे ही मंत्री पद नहीं मिला, वैसे ही उन्हें “बुंदेलखंड के साथ अन्याय” दिखाई देने लगा।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की जनता अब नेताओं की अवसरवादी राजनीति को समझ चुकी है। पानी संकट, बेरोजगारी, पलायन, किसानों की बदहाली और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर वर्षों तक चुप रहने वाले लोग आज केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए बुंदेलखंड का नाम ले रहे हैं। प्रवीण पांडेय ने कहा कि वास्तविकता यह है कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण की सबसे बड़ी बाधा वही जनप्रतिनिधि रहे हैं, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए कभी इस मांग को मजबूती से नहीं उठाया। यदि सभी विधायक और सांसद ईमानदारी से एकजुट होकर बुंदेलखंड राज्य के पक्ष में आवाज उठाते, तो आज स्थिति अलग होती।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड राष्ट्र समिति मिशन 2027 के तहत गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाएगी और जनता को बताएगी कि अलग बुंदेलखंड राज्य ही क्षेत्र के विकास, रोजगार, जल संकट समाधान और युवाओं के भविष्य का स्थायी रास्ता है। “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” जनता से एकजुट होने का आह्वान उन्होंने बुंदेलखंड की जनता से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि लोग जाति और दल से ऊपर उठकर अपने अधिकारों के लिए संगठित हों और बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को जनांदोलन बनाएं। अंत में उन्होंने कहा  “राज्य निर्माण के समर्थन में आइए, वरना सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।”