
Pardarshi Vikas News Mathura
अक्षय तृतीया पर्व पर ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वर्ष में केवल एक बार होने वाले चरण दर्शन के लिए सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर पहुंची। भक्त भगवान के चरणों के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते नजर आए।
अक्षय तृतीया के विशेष अवसर पर ठाकुर जी का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान बांके बिहारी ने पीली जड़ाऊ पोशाक धारण की, जबकि सिर पर मोरपंख मुकुट सुशोभित रहा। मंदिर परिसर को पीले फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान के चरणों में चंदन से बना लड्डू अर्पित किया गया, वहीं भोग में सत्तू के लड्डू और शरबत लगाया गया।
मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन व मंदिर प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए थे।
अक्षय तृतीया पर भगवान को पायल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई गई। मान्यता है कि इस दिन कुंवारी कन्याएं यदि ठाकुर जी को पायल अर्पित करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में भक्तों ने पायल चढ़ाई, जिनमें सोने-चांदी की पायल भी शामिल रहीं।
मंदिर के सेवायतों के अनुसार, अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी के दर्शन करने से बद्रीनाथ धाम के दर्शन के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी मान्यता के चलते देशभर से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।
बद्रीनाथ धाम के दर्शन के बराबर मिलता है फल मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान बांके बिहारी जी के दर्शन करने से भक्तों को भगवान बद्रीनाथ धाम के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है। मंदिर के सेवायत प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण के माता-पिता नंदबाबा और माता यशोदा बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे, तब भगवान ने उन्हें ब्रजभूमि में ही अक्षय तृतीया के दिन बद्रीनाथ के दर्शन कराए थे