
पारदर्शी विकास न्यूज़ बिसण्डा (बांदा)। टीबी मुक्त भारत अभियान के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सोमवार को आदर्श इण्टर कालेज, बिसण्डा में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस 100 दिवसीय अभियान के माध्यम से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को टीबी (क्षय रोग) के लक्षण, बचाव और शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।शिविर में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण महसूस हों, तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए।विशेषज्ञों ने आगाह किया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, मधुमेह (डायबिटीज), एचआईवी या किसी लंबी बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों में टीबी होने का जोखिम अधिक रहता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। शिविर के दौरान जानकारी दी गई कि टीबी का पूर्ण उपचार 6 माह तक चलता है और दवाएं मरीज के निवास के पास स्थित डाट्स सेंटर पर मुफ्त उपलब्ध हैं। बिसण्डा समेत बांदा, बबेरू, जसपुरा, अतर्रा, नरैनी, बहेरी, तिन्दवारी, कमासिन और कालिन्जर के स्वास्थ्य केंद्रों पर नॉट मशीन द्वारा बलगम की निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है।निःक्षय पोषण योजना के तहत मरीज को इलाज के दौरान बेहतर खान-पान के लिए 1,000 रुपये प्रति माह सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं।कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसण्डा से वरिष्ठ क्षय रोग पर्यवेक्षक ललित कुमार ने तकनीकी जानकारी साझा की। इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र कुमार मिश्र सहित समस्त शिक्षकगण और लगभग 100 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। शिविर के अंत में सभी को टीबी उन्मूलन के प्रति जागरूक रहने की शपथ दिलाई गई।