
पारदर्शी विकाश न्यूज़ लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा बिना कारण संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से पिछले ढाई वर्षों में हटाए गए लगभग 25 हजार संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लेने की मांग की है।संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के उपकेंद्रों पर 20 संविदा कर्मियों की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसी व्यवस्था के आधार पर वर्षों तक प्रदेश की विद्युत आपूर्ति प्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती रही।समिति का आरोप है कि अक्टूबर 2024 से कथित "मैनपावर रेशनलाइजेशन" और निजीकरण की तैयारी के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाने का अभियान शुरू किया गया। समिति के अनुसार नवंबर 2024 में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया की घोषणा के बाद संविदा कर्मियों की संख्या में कटौती तेज कर दी गई।संघर्ष समिति ने कहा कि नए टेंडरों में निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए शहरी क्षेत्रों में 36 के स्थान पर 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 के स्थान पर 12.5 संविदा कर्मियों का प्रावधान किया जा रहा है। वहीं, लखनऊ सहित जिन क्षेत्रों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू की गई है, वहां शहरी क्षेत्रों में यह संख्या घटाकर 7.5 कर दी गई है। इसके चलते बड़ी संख्या में अनुभवी संविदा कर्मी सेवा से बाहर हो गए हैं, जिनमें ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने 20 से 25 वर्षों तक विद्युत व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में योगदान दिया है।समिति ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 25 हजार से अधिक संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। साथ ही 55 वर्ष की आयु पूरी होने पर संविदा कर्मियों को अनिवार्य रूप से हटाने के निर्णय को भी अन्यायपूर्ण और अमानवीय बताया गया। समिति ने कहा कि अनेक कर्मचारी बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में घायल हुए, फिर भी उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया।संघर्ष समिति का कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद विद्युत आपूर्ति में आने वाले फॉल्टों को ठीक करने वाले अनुभवी संविदा कर्मियों की संख्या लगातार कम की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और नियमित कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ गया है।समिति ने मांग की कि ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के अनुरूप वर्ष 2017 के निर्धारित मानकों की बहाली करते हुए सभी हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए तथा विद्युत वितरण व्यवस्था में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराकर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।