
पारदर्शी विकास न्यूज़ सहारनपुर। सहकार भारती सहारनपुर विभाग एवं मंडल का अभ्यास वर्ग गुर्जर भवन, सहारनपुर में भारत माता एवं श्रद्धेय इनामदार जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र समेत कुल छह सत्रों में विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और कार्यक्रम का समापन किया गया।उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि सहारनपुर महापौर अजय कुमार वर्मा रहे। कार्यक्रम में सहकार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता, प्रदेश महामंत्री अरविन्द दुबे, गंगोह विधायक कीरत सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष अभय चौधरी तथा डीसीडीएफ सभापति स्वमेंद्र सिंह राणा की उपस्थिति रही। वक्ताओं ने सहकारिता के माध्यम से समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा संगठन को जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।अभ्यास वर्ग के अन्य सत्रों में सुनील गुप्ता, अरविन्द दुबे, अभय चौधरी, प्रदेश आईटी प्रमुख संजय सिंह, प्रदेश अक्षय ऊर्जा प्रमुख उमाकांत शर्मा और पैक्स सह प्रमुख हीरेन्द्र सिंह ने विभिन्न विषयों पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वक्ताओं ने सहकारी संस्थाओं की भूमिका, तकनीक, अक्षय ऊर्जा और पैक्स व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।समापन सत्र में अजीत राणा, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक, की भी उपस्थिति रही। अभ्यास वर्ग में शामली जिला अध्यक्ष शेषपाल एवं पदाधिकारी, महानगर अध्यक्ष अंचल सिंह, मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह सहित चार जिलों के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग शामिल हुए। महिला प्रमुख सपना चौधरी और विश्वास चौधरी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।कार्यक्रम के अंत में विभाग प्रमुख सहारनपुर हिमांशु पुंडीर ने सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। सहकारी संस्थाओं को मजबूत कर किसानों, ग्रामीणों और छोटे कारोबारियों को सीधे लाभ पहुंचाया जा सकता है। कार्यकर्ताओं को संगठन की नीतियों और सहकारिता के उद्देश्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मजबूत संगठन और बेहतर समन्वय से सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी। — अरविन्द दुबे
सहकारिता के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा सकता है। सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है। कार्यकर्ता आपसी समन्वय के साथ गांवों तक पहुंचें और लोगों को सहकारिता से मिलने वाले लाभों की जानकारी दें। मजबूत सहकारी व्यवस्था किसानों और ग्रामीण क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। — सुनील गुप्ता