
PARDARSHI VIKASH NEWS दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘स्टारशिप’ के नए वर्जन (V3) का पहला टेस्ट मिशन सफलताओं और तकनीकी खामियों के मिले-जुले नतीजों के साथ पूरा हुआ।टेक्सास के स्टारबेस से लॉन्च के बाद उड़ान के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं। सुपर हैवी बूस्टर ‘बैक बर्न’ प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका, जिससे उसकी नियंत्रित वापसी संभव नहीं हो पाई और वह समुद्र में अनियंत्रित तरीके से गिरा।वहीं स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट के छह में से केवल पांच इंजन ही सही से चालू हो सके। इसके बावजूद यह सब-ऑर्बिटल फ्लाइट पूरी करने में सफल रहा और लगभग एक घंटे की उड़ान के बाद हिंद महासागर में सुरक्षित नियंत्रित लैंडिंग कर ली गई।इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य रॉकेट के लॉन्च, स्टेज सेपरेशन, इंजन री-इग्निशन और कंट्रोल्ड लैंडिंग जैसी क्षमताओं को परखना था। हालांकि इंजन फेल्योर और बूस्टर की लैंडिंग से जुड़ी दिक्कतों ने भविष्य के सुधार के लिए अहम डेटा उपलब्ध कराया।स्पेसएक्स की स्टारशिप प्रणाली में सुपर हैवी बूस्टर और ऊपरी स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट शामिल होते हैं, जो पूरी तरह पुन: उपयोग (reusable) के लिए डिजाइन किए गए हैं। इस नए वर्जन को भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों और अंतरग्रहीय यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।