
PARDARSHI VIKASH NEWS अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी मामले में जांच के दौरान नए तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट को अप्रैल 2025 में ही चढ़ावे की गणना में संभावित अनियमितताओं के संकेत मिल गए थे। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की गई, लेकिन करीब एक वर्ष बाद भी इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका।सूत्रों के मुताबिक, SOP में गणना कक्ष में बिना जेब वाली विशेष वर्दी, प्रवेश और निकासी के समय अनिवार्य जांच, निजी सुरक्षा गार्डों की तैनाती, ट्रस्ट कर्मचारियों की निगरानी में मौजूदगी तथा उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे प्रावधान शामिल थे। साथ ही सीसीटीवी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने का भी प्रावधान था, जबकि मौजूदा व्यवस्था में फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रह पाती थी।जांच में यह भी सामने आया है कि SOP के कई प्रावधान केवल कागजों तक सीमित रहे। गणना कक्ष में लोगों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ी। विशेष जांच दल (SIT) अब यह पता लगाने में जुटा है कि सुरक्षा मानकों के पालन में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। इस बीच सपा नेता पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि यदि SOP लागू होती तो चढ़ावे में गड़बड़ी की नौबत नहीं आती।