
Pardarshi Vikas News Kanpur
कानपुर जैसे बड़े शहर में नाला–नहर की सफाई हर साल एक बड़ा मुद्दा बनती है, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं लेते। खासकर सीटीआई नहर की स्थिति इस समस्या की सच्चाई बयां करती है। नगर निगम और जनप्रतिनिधि हर बार सफाई के दावे करते हैं, योजनाएं बनती हैं, बजट पास होता है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है—गंदगी से भरी नहरें और जाम नाले। मानसून से पहले कागजों में सफाई अभियान पूरा दिखा दिया जाता है, जबकि सीटीआई नहर समेत कई जगहों पर वास्तविक सफाई अधूरी ही रह जाती है। जहां सफाई होती भी है, वहां निकाली गई सिल्ट और कचरे को किनारे ही छोड़ दिया जाता है, जो कुछ ही दिनों में वापस नहर में बहकर पहुंच जाता है। इससे पूरी प्रक्रिया सिर्फ दिखावे तक सीमित रह जाती है।हर साल सफाई के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन सीटीआई नहर की हालत देखकर यह सवाल उठता है कि आखिर यह पैसा कहां जा रहा है। नहर में जमा कचरा और गंदगी न केवल जल निकासी को बाधित करता है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बदबू और बीमारियों का कारण भी बनता है।इस लापरवाही का सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों पर पड़ता है। बारिश के दौरान नहर की सफाई न होने से जलभराव की समस्या बढ़ जाती है, सड़कों पर पानी भर जाता है और घरों तक गंदा पानी पहुंचने लगता है। लोग हर साल शिकायत करते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रहती है।जरूरत इस बात की है कि नगर निगम और जनप्रतिनिधि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि सीटीआई नहर जैसी महत्वपूर्ण जल निकासी व्यवस्था की नियमित और प्रभावी सफाई सुनिश्चित करें। जब तक काम की निगरानी और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह समस्या यूं ही बनी रहेगी और जनता को हर साल परेशान होना पड़ेगा।